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Words Of Chandan

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yours

Chandan Sharma

बहुत अरमान हैं परिंदे तेरे ,
चंदन समझता है ,
मगर उस कारीगर का क्या ….?
जो बस पिंजरा बनाता है…

post

​”सिर में जो इतने भारी भरकम सवाल लिये घूमते हो

देखना किसी दिन तुम्हारी गर्दन न लचक जाये”

“कल की ख़ता को याद रख
मिलनी सजा है ये याद रख
झूठ कहे हैं कितने ही कहने हैं

सब की वजह को याद रख ”

                          – चंदन

कोई तो है जो सब जानता है

तुम्हारे और मेरे बीच में 

कोई तो है जो जानता है 

सबकुछ बहुत कुछ और

बता जाता है तुम्हारा ​

क्या हाल है और तुम्हे भी

सब हाल मेरा बताता है

बिन पूछे मगर न जाने

कब ये शख्स आएगा 

सामने और बताएगा 

सच्चाई खुद की भी 

कि क्यों आखिर क्यों 

बताता रहा पूरी तरह से

मेरा हाल तुमको भी और

तुम्हारा हाल मुझको भी 

और क्यूँ ना करने दी कोशिश

मुझे तुमसे कुछ पूछने की

और तुम्हें भी आखिर क्यूं? 

                    -चंदन

कौन से मौके पे तू सीने से लगाएगा

न जाने कब खत्म होगा

ये सिलसिला बंजारेपन का,
न जाने कब किराये की दिवारें
 मु चिढाना बंद करेंगीं,

न जाने कौन से शहर में

 सच्चा दर मिलेगा खुदा ,

न जाने कौन सा मकां मुझे

 अपना मालिक बुलाएगा ।

 न जाने कौन से वादे में 

दम निकलेगा यार के,

न जाने कौन सा शख्स,

 हम पर जान लुटायेगा,

न जाने कौन सी इबादत पे,

तू रोएगा ऐ खुदा,

न जाने कौन से मौके पे 

 तू सीने से लगाएगा ।

                –  चंदन